
इनकम टैक्स बिल 2025: 12 लाख स्लैब का क्या होगा
12 अगस्त 2025 को संसद ने नया इन्कम-टैक्स बिल, 2025 पारित कर दिया, जिसे पहले लोकसभा और फिर राज्यसभा द्वारा मंजूरी मिली। बिल 1961 के पुराने अधिनियम को प्रतिस्थापित करेगा तथा लागू होने की संभावना 1 अप्रैल 2026 यानी वित्त वर्ष 2026-27 से है।
1.नया इनकम टैक्स बिल लाने का मुख्य उद्देश्य
इनकम टैक्स बिल 2025 का मकसद है टैक्स व्यवस्था को सरल, पारदर्शी, और तकनीकी दृष्टिकोण से आधुनिक बनाना—जटिलता कम करना, अनुपालन भार घटाना, और डिजिटल-फर्स्ट प्रक्रियाएँ लाना।
बिल में कई प्रावधान—जैसे delayed return पर रिफंड, standard deduction, pre-construction interest, commuted pension, anonymous donations, vacant property taxation—पर स्पष्टता लाई गई है।
2. टैक्स स्लैब: क्या बदला है या वैसा ही रहा?
ए. नई टैक्स स्लैब (नया टैक्स रेजीम, FY 2025-26 से लागू)
आय ₹0–₹4 लाख: टैक्स शून्य
₹4 लाख–₹8 लाख: 5%
₹8 लाख–₹12 लाख: 10%
₹12 लाख–₹16 लाख: 15%
₹16 लाख–₹20 लाख: 20%
₹20 लाख–₹24 लाख: 25%
₹24 लाख से ऊपर: 30%
यह नया स्लैब एक अधिक संरचित और प्रगतिशील दृष्टिकोण को दर्शाता है, जहाँ बेसिक छूट सीमा में वृद्धि की गई है|
बी. ₹12.75 लाख तक पूरी टैक्स-मुक्तता (सैलरी/पेंशनधारियों के लिए)
Standard deduction ₹75,000 तक बढ़ाया गया है। इससे ₹12 लाख की आय पर टैक्स शून्य होने का लाभ ₹12.75 लाख तक फैलेगा|
टैक्स रिबेट सीमा (Section 87A) ₹25,000 से बढ़ाकर ₹60,000 कर दी गई है—जिससे ₹12 लाख तक की आय पर पूरा रिबेट मिल सकता है|
सी. पुराना स्लैब अपरिवर्तित
पिछले टैक्स स्लैब (old regime, FY 2024-25) में कोई बदलाव नहीं किया गया; नया स्लैब विकल्प आधारित है और नया टैक्स रेजीम default माना गया है|
3. करदाताओं पर प्रभाव
ए. मध्यम-वर्ग के लिए राहत
₹12 लाख तक की आय के लिए टैक्स पूरी तरह से शून्य—इससे करदाताओं की जेब पर भारी बोझ कम हुआ है।
₹12.75 लाख तक की आय पर भी टैक्स बचाव संभव हुआ (स्टैंडर्ड डिडक्शन और रिबेट के कारण)।
बी. उच्च-आय वर्ग पर स्लैब संरचना स्पष्ट और लैस
स्लैब संरचना अब अधिक स्पष्ट, नियमित, और आसानी से समझने योग्य हो गई है।
30% की अधिकतम दर अब ₹24 लाख से ऊपर की आय पर ही लागू होगी; इससे स्लैब संरचना अधिक न्यायपूर्ण हुई है।
सी. अनुपालन में आसान ढांचा
स्लैब की स्पष्ट परिभाषा और टैक्स-मुक्त सीमा की विस्तार ने करदाता के लिए निर्णय लेना और टैक्स प्लान करना आसान बनाया है।
नई व्यवस्था डिजिटल-फर्स्ट दृष्टिकोण के साथ जुड़ी हुई है, जिससे नियंत्रित और पारदर्शी अनुपालन संभव हो सकेगा।
4. मुख्य बिंदु संक्षेप
नया टैक्स स्लैब संरचना—₹0-₹4 लाख तक शून्य, प्रगतिशील दरें (5%, 10%, 15%, 20%, 25%, 30%)
₹75,000 तक स्टैंडर्ड डिडक्शन — टैक्स-मुक्त सीमा ₹12.75 लाख तक बढ़ी
Section 87A रिबेट ₹60,000 तक — ₹12 लाख आय तक टैक्स शून्य बनाए रखने में मदद
पुराना स्लैब अपरिवर्तित — नया टैक्स रेजीम default विकल्प
5. विधायी प्रक्रिया और परिप्रेक्ष्य
A. नया बिल, Income-Tax (No. 2) Bill, 2025, Select Committee द्वारा सुझाए गए 285 सुझावों के आधार पर संशोधित रूप में तैयार किया गया और 11-12 अगस्त 2025 को संसद में पारित हुआ|
B. इस बिल का उद्देश्य करकानूनी भाषा को सरल बनाना, अनुपालन को आसान करना, और डिजिटल-प्रक्रियाओं के ज़रिए प्रशासन को पारदर्शी बनाना था।
6. टैक्स स्लैब सुधारों का व्यापक प्रभाव
बेसिक टैक्स-मुक्त सीमा ₹3 लाख से बढ़ाकर ₹4 लाख कर दी गई जिससे सबसे कम आय वर्ग को लाभ मिला
सैलरी और पेंशनधारियों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन ₹75,000lara तक बढ़ा दिया गया—इससे वास्तविक टैक्स-मुक्त सीमा ₹12.75 लाख हो गई
Section 87A रिबेट ₹60,000 तक बढ़ाया गया—फायदा: ₹12 लाख तक की आय वालों को पूर्ण टैक्स छूट मिलेगी।
7. आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
A.उपभोक्ता खर्च और आर्थिक गति
टैक्स-मुक्त सीमा और बचत में वृद्धि से घरेलू खर्च और निवेश को बढ़ावा मिलेगा|
सरकारी राजस्व पर प्रभाव:
टैक्स संग्रह में कमी दर्ज की गई (April–August 2025 में direct tax collection में 4 % साल-दर-साल गिरावट) लेकिन रिफंड बढ़े और वित्त वर्ष के अंत तक राजस्व में सुधार की आशा है|
नया टैक्स स्लैब और रिबेट, डिडक्शन से मध्यम-आय वर्ग को मजबूत राहत मिली है।
पूरे ढाँचे में पारदर्शिता, ज़्यादा स्पष्ट नियम, और डिजिटल-प्रक्रियाओं से अनुपालन आसान हुआ है।
हालांकि कीमत जिसके प्रभाव से कर संग्रह में थोड़ी कमी आई है, लेकिन सरकार उम्मीद कर रही है कि स्थिर आर्थिक वृद्धि और बढ़ते टैक्स दाता आधार से राजस्व पुनः बढ़ेगा।
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